इतना दुख तो मुझे राम और भरत के बिछडणे पर भी नहीं hua था जितना आज अमर सिंग और मुलायम के होने पर होता हैं. जैसे जिस्म से रूह अलग हो गया हो. इनका भात्र प्रेम मुझे हमेशा भाव विव्हल करता रहा हैं. कई बार कोशिश की इनके पवित्र रिश्तो को समझने की मगर असफल ही रहा. सुब्रतो रॉय ने मुलायम सिंग को, अमर सिंग ने सुब्रतो को, अमिताभ ने अमर सिंग को बडे भैया बनाया फिर पूरा फिल्मी संसार उनका भाई- बहन होने को बेताब हो गया और यह परिवार इतना बडा हो गया कि समझना और जटील हो गया. फिर एक दिन मायावती का पूरे उत्तर प्रदेश में मायाजाल फैल गया. और यह पूरा कुनबा चित हो गया. जब आरबीआई ने शिकंजा कसना शुरू किया तो सुब्रतो ने कांग्रेस की तरफ पिंगे बढाना शुरू कर दिया और राजीव शुक्ला को भाई बना लिया. अमर भैया बुरी तरह चिढ गये. और जब माया मिली न राम (यानी न सेंटर में सत्ता मिली न प्रदेश में) तो मुलायम भैया को भी अपने खून के भाईयो की ही सुननी पडी.
मुझे भी एक अदद ऐसे ही बडे भाई की तलाश हैं. राहुल (गांधी)तुम सुन रहे हो?
Hope
8 years ago
