अगर मैं लड़की होता तो क्या होता? अव्वल तो मुझे नौकरी जैसी चीज़ नहीं करनी पड़ती. करता भी तो शौकिया. घर बैठे ऐश करता. हज़ार पीछे घूमते, कितने आह भरते. आनलाईन होता तो सैकडो मक्खी की तरह चैट करने के लिए चिपक जाते. बॉस कभी अकड़ कर बात नहीं करता, पगार जल्दी जल्दी बढती; प्रमोशन फ़टाफ़ट मिलता. पालिटिक्स में भी औरतों के लिए अच्छा खासा स्कोप होता है.
मिस वर्ल्ड बनकर फिल्मों में उतरता. रातों रात किस्मत बुलंद हो जाती. जिनको छू देता, तर जाते. लटके झटके दिखा कर टी वी शो तो कर ही लेता. लोग पार्टियों में बुलाते. हीरोईन नहीं तो बिकनी पहन कर आईटम नंबर तो कर ही लेता. कुछ नहीं तो चीयरलीडर्स में अच्छी आमदनी हो जाती. थोडी उम्र ढलने लगती तो किसी बिजनेसमैन को पटा लेता ताकि बुढापा आराम से कट सके. 'एन आर आई' वाला आप्शन तो हमेशा खुला है. मैं लड़की होता तो कोई मामूली लड़की थोड़े होता. आप जानते हैं मेरा मतलब. कितने उद्योगपति और नेतागण ऐसी जानलेवा अदाओं के शिकार हुए हैं.
दो लाख लोग रोज़ मेरा प्रोफाईल निहारते. मीठी मीठी बातें लिखते. अपना दिल स्कैन करके भेजते रहते. हाल चाल लेने और गिफ्ट देने वालों का तांता लगा रहता. आसानी से कारों में लिफ्ट मिल जाती. अभी दो चार लोग मेरे ब्लॉग पर कमेन्ट लिखते हैं, तब हज़ार लोग लिखते. शादी हो जाती तो पति चू **** की तरह काम करता और मैं किटी पार्टियां आयोजित करता. नए नए शौक़ होते मसलन 'इंटीरियर डिजायनिंग' पेंटिंग्स खरीदना वगैरह. अगर किस्मत वहाँ भी साथ नहीं देती तो किसी फ़िल्मी हीरो के घर में 'कामवाली' की नौकरी का बेहतरीन विकल्प तो है ही.
मेरे बड़े भाई साहब आज भी ताना मारते हैं कि मैं एक लड़की नहीं पटा सका. तब ऐसे जहर बुझे ताने तो नहीं सहने पड़ते!!