अब तक तो आप समझ ही चुके होंगे की मेरे पास कोई काम धाम नहीं है. और ये भी की मेरे दिमाग में कितना कचरा भरा है. लेकिन खुदा कसम जो मैंने किसी के साथ कोई बदतमीजी की हो. कभी किसी लड़की को आँख नहीं मारी या सिटी नहीं बजाई (यह बात और है की ऐसी तबियत कई बार हुई).
तो आप किस्मत में यकीन नहीं करते हैं? फिर इसे आप और क्या कहेंगें पिछले बीस सालों में कभी भी कोई खूबसूरत लड़की मेरे बगल में आकर नहीं बैठी? खड़ी होकर सफ़र कर लेगी पर मेरे बगल में नहीं बैठेगी. भला हो उस नशेड़ी ड्राइवर का और सड़क बनाने वालों का. अगर ऐसे खूबसूरत गड्ढे नहीं होते तो मैं इस जन्म में नारी स्पर्श से वंचित ही रह जाता.
ट्रेन में चढ़ने से पहले सबसे पहले रिजर्वेशन लिस्ट पर निगाह दौडाता हूँ काश कोई खूबसूरत परी मेरे साथ सफ़र करे. कोई खूबसूरत हमसफ़र हो तो सफ़र का पता ही नहीं चलता. फिर चाहे ट्रेन एक के बदले चार दिन क्यूँ ना ले ले. ज़रा से भी शिकन नहीं आती. खूबसूरती को आत्मसात करके जो परमानन्द प्राप्त होता है वह किसी स्वर्गीक अनुभव से कतई कम नहीं होता. मेरा दुर्भाग्य देखिये की हमेशा खडूस बुड्ढे या पायरिया ग्रस्त आंटियां ही मेरे साथ सफ़र करती हैं. स्लीपर क्लास से एसी थ्री फिर एसी टू में भी सफ़र किया. यहाँ तक की हवाई जहाज में भी चढ़ लिया मगर ऐसा सुअवसर प्राप्त नहीं हुआ.
पाठक समझेगें की मैं बड़ा रसीक किसिम का इंसान हूँ या लौंडीयाबाजी की गन्दी गन्दी बातें करता हूँ. भई सिर्फ बातें ही तो करता हूँ. मैंने ना तो नाज़नीनों के कपडे चुराए ना किसी स्त्री का चीरहरण किया. यही काम कृष्ण ने किये तो आपने कहा प्रभु लीला कर रहे हैं. और आप खामखा मुझे तोहमत दे रहे हैं? यह तो सरासर नाइंसाफी है भाई.
Hope
8 years ago

shabd aur soch ka locha hai...
ReplyDeleteइसे पढ़कर लगा कि बस लिखना था इसलिए लिख दिया। न सिर न पैर। बस कुछ भी...
ReplyDeleteशुक्रिया बहुत बहुत दोस्तों. जरूरी नहीं आप मुझसे सहमत हों. या मेरी हर बात आप को पसंद ही आये. बेशक अपनी नाराज़गी जाहिर करें. आपका हमेशा स्वागत है.
ReplyDeleteआपका