Thursday, August 27, 2009

'शोर्ट कट' का है जमाना

लोग कहते हैं एक पैराग्राफ में अपनी बात लिखो? लेकिन कैसे संभव है? क्या उपन्यास को एक पेज में लिखा जा सकता है? लेकिन भाई, फास्ट फ़ूड का जमाना है सबको जल्दी मची है. कभी कभी सोचता हूँ कल की नस्ल क्या पेशाब करने के लिए 'सुलभ शौचालय' जायेगी या पैंट में ही करा करेगी? आजकल प्यार भी ऐसे ही हो रहा है. "ऐ, जल्दी पटती है तो पट वरना कलटी मार, अपुन के पास ज्यादा टाइम नहीं है". टेस्ट मैच से वन डे फिर ट्वेंटी ट्वेंटी तक आ गए. अब क्या टॉस करवा के ही मैच जितवा दोगे?

एक संघर्षरत युवक कुछ वर्ष पहले मेरे पीछे पड़े थे. हरियाणा से इंजीनियरिंग करके आये थे. मार्शल आर्ट्स में बड़े निपुण थे और बार बार अक्षय कुमार को पटखनी देने की बात करते थे. जल्दी से 'सुपर स्टार' बन जाना चाहते थे. मैंने कहा भाई, किसी ऐसे वैसों को पकडो जिनकी कोई कंवारी बेटी या बहन हो. उसे पता लो फिर हीरो बन ही जाओगे. यही सबसे शोर्ट कट है. फिर पूछने लगे कि किसे पताऊँ? मैंने कहा "सलमान की एक बहन अभी खाली है, किस्मत आजमा सकते हो". अक्सर फ़ोन करके मुझे परेशान करते रहते थे. किस डिरेक्टर की बेटी या बहन जवान हो रही है क्या मैं यही हिसाब करता फिर रहा हूँ? एक दिन पूछने लगे की करण जौहर के यहाँ दाल गल सकती है? क्यूँ? शाहरुख़ क्या इतना बूढा हो गया है? खैर.

लोग करें भी तो क्या? एक दौर था जब टिकेट ब्लैक करने वाले, बस कंडक्टर, झाडू मारनेवाला कोई भी हीरो बन जाता था. कुछ लोग तो हीरोइनों का छाता इसी उम्मीद में ही ढोया करते थे और कामयाब भी हुए. प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गयी है और आप अभी भी 'कास्टिंग काउच' से घबरा जाते हैं? अब तो हीरोइनें ना तो नदी में डूबती हैं ना सेट पर आग ही लगती है. अब कोई देवानंद या सुनील दत्त कैसे बने?

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