Wednesday, July 8, 2009

Mumbai

बस और ट्रेन के धक्कों से
सीधी हो जाती है कमर

सारा दिन धुल और धुंए से
पेट जाता है भर

और जो रहा सहा होता है
वो सब भूल जाता है पीकर

That’s Mumbai
The city I hate to love.

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