Thursday, July 9, 2009

लोग थूकते क्यूँ हैं भाई?

लोग थूकते क्यूँ हैं भाई? यह सवाल अक्सर मेरे दिमाग में कौंध जाता है जब भी मैं किसी को थूकता हुआ पाता हूँ. और यह हर रोज़ होता है. जहाँ देखो, जब देखो लोग चपाक से थूक देते हैं. बिना आगे- पीछे देखे बिना. मुझे घिन कम गुस्सा ज्यादा आता है. थूक कर लोग टीबी ही नहीं फैलाते अपितु एक असभ्य समाज का परिचय देते हैं. ऐसे ऐसे स्टाइल, साइज़ और डिजाईन में थूकते हैं कि पूछो मत. जहाँ लिखा हो 'थूकना मना है' वहीँ थूकेगें. रेलवे पूल पर चढ़ते हुए मैं अक्सर बड़े- बड़े, रंग- बिरंगे थूक देखता हूँ तो जी में आता है थूकने वाले को पकड़कर एक जोर से चांटा दूं.

बचपन में पहले मैं भी थूकता था जब कोई भी बदबूदार चीज़ या मरा हुआ जानवर देख लेता या किसी को थूकते हुए देख लेता. और तब तक थूकता था जब तक कि मैं थक नहीं जाता. फिर एक दिन मैंने स्वयं से पूछा 'क्या इससे कुछ फायदा होता है?'. तबसे मेरा थूकना हमेशा के लिए बंद हो गया.

5 comments:

  1. अरे इसलिये थूकते हैं भाई क्योंकि हम भारतीय हैं, भारत में रहते हैं, और भारत में कहीं भी, कभी भी, कुछ भी करने की स्वतन्त्रता है…। हाँ लेकिन जब हम विदेश जाते हैं तब वहाँ नहीं थूकते, क्योंकि वहाँ की पुलिस और कानून सीधे पिछवाड़े में डण्डा कर देते हैं, ये भी नहीं देखते कि थूकने वाले का धर्म क्या है और उसका बाप नेता या अधिकारी तो नही है…। "मेरा भारत महान" खामखा ही नहीं कहा गया है…

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  2. हिंदुस्तान में आप दो चीजों पर कभी पाबंदी नहीं लगा सकते; एक थूकने और दूसरे गाली देने पर।

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  3. haa haa haa maiM to aisee divaaroM yaa saDak kee or thookati bhee nahin dekhanaa to door bhai ab apane des me kahaan kahan thookate firenge yahaan to bahut kuch gandaa hai ye sliva haajame ke liye bachaaye rakho

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  4. दोस्तों आप सही हैं. मगर हमे स्वतंत्रता का अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहिए. यह एक अत्यंत गंभीर विषय है लेकिन दुःख है हम कुछ कर नहीं सकते. जब हमारी सरकार गुटका और सिगरेट के बेचने पर पाबन्दी नहीं लगा सकती, हम ऐसी सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं? कम से कम हम सार्वजानिक स्थानों पर गन्दगी फैलाने से बच सकते हैं.

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  5. जाने क्यूँ थूकते हैं मगर अपने घर के भीतर उनकी आदत बदल जाती है, जाने क्यूँ!

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