मुंबई में कोई भी इंसान भूखा नहीं मर सकता. यहाँ सबके लिए अवसर है बस यह आप पर निर्भर है कि आप उसे पहचान पाते हैं या नहीं. हर जगह छोटे छोटे स्टाल लगाये लोग मिल जायेंगें- भेल पूरी, ताजे फूल, फिल्मों की सीडी, डीवीडी, करी पत्ते, केले, नीम्बू पानी इत्यादि. ऐसी ऐसी चीज़ें जिनकी आप कल्पना भर कर सकते हैं. ऑफिस जाते लोगों के लिए सुबह सुबह नाश्ता स्टेशन के पास उपलब्ध मिलेगा. लंच के वक़्त फलों का सलाद आपके ऑफिस के गेट के ठीक बाहर. कदम कदम पर रेस्तरां, जहां सस्ते भोज़न और खाने पीने की चीज़ें आपके मुंह को आराम करने का मौका नहीं देंगीं. ये सब चीज़ें तो हर बड़े शहर में मिल जाती हैं लेकिन मुंबई की खास बात है सिर्फ पांच रुपये में बड़ा पाव या दस रुपये में एक प्लेट इडली या मेदू बड़ा. यानी चट पट भोज़न कीजिये और काम पर चलिए.
अब ऐसे में आप साफ़ सफाई की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? बेशक़ बाकी विदेशी शहरों जैसे न्यू यार्क, लन्दन या शंघाई के मुकाबले मुंबई निहायती गन्दा है. बिडम्बना ही है कि लगभग हर बहुमंजिली इमारत को घेरे हुए 'चालें' दिखेगीं. पर मुंबई में सिर्फ झुग्गियां ही नहीं हैं, यहाँ गगनचुम्बी इमारतें भी हैं. साउथ मुंबई जहाँ कोलाबा और नरीमन पॉइंट जैसे बिज़नस हब हैं, जहाँ भारत के सबसे सम्पन्न व्यावसायिक परिवार जैसे अम्बानी और टाटा रहते हैं तथा कंपनियों के हेड ओफिसेस हैं. एक अलग 'एहसास' मिलता है जो ब्रिटिश साम्राज्वाद की निशानी हैं.
Hope
8 years ago

सही है की मुंबई गन्दा है लेकिन चंगा है...जहाँ इतने लोग रहेंगे वहां गन्दगी होना स्वाभाविक भी है दूसरे हमारी समझ भी इतनी ही है की सफाई का ख्याल नहीं करते..
ReplyDeleteनीरज
नीरज, आपकी टिपण्णी के लिए हार्दिक आभारी हूँ. आशा है आप भविष्य में भी निष्पक्ष टिपण्णी करते रहेंगें. निम्नलिखित ब्लॉग को पढने का अनुरोध करूंगा.
ReplyDeletehttp://feelforthem.blogspot.com/2009/01/ill-mannered-indians.html